Friday, May 18, 2012
हुस्सेपुर में ग्रामसभा की बैठक
नाबार्ड के सहयोग से मिशन आई ने लिया हुस्सेपुर परनी छपरा को गोद
नाबार्ड के सहयोग से मिशन आई ने लिया हुस्सेपुर परनी छपरा को गोद
Tuesday, April 24, 2012
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| किसानों को संबोधित करते नाबार्ड की डीडीएम प्रीति थॉमस. साथ में वैज्ञानिक डॉ. गोकुलेश झा |
पारू प्रखंड के चान्द्केवारी स्थित विद्यालय में १७ अप्रैल २०१२ को मिशन आई इंटरनॅशनल सर्विस द्वारा संपोषित एवं नाबार्ड द्वारा वित्तपोषित "किसान साथी क्लब" के बैनर तले "सब्जी की खेती" विषयक एक कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें नाबार्ड की जिला विकास प्रबंधक प्रीति थॉमस, वरीय वैज्ञानिक डॉ. गोकुलेश झा, मिशन आई के अध्यक्ष संतोष सारंग, अप्पन समाचार के अमृतांज इन्दीवर, फूलदेव पटेल, पंकज सिंह समेत करीब तीन दर्जन किसान शामिल हुए. कार्यक्रम में सब्जी उत्पादन बढ़ाने के उपायों पर विमर्श हुआ. डॉ. झा ने आलू की खेती पर विस्तार से चर्चा किया.
Tuesday, January 18, 2011
Wednesday, January 5, 2011
मिशन आई एक क्रांति है
मिशन आई का मिशन है ये, सबको उसका अधिकार मिले
आज नहीं तो कल सबको, उसका सपना साकार मिले.
मिशन आई एक क्रांति हैं!
मेहनत की, मजदूरी की
उम्र भी लगभग पूरी की
न पेट भरा जिसका अबतक
सांसों से थके इस बूढ़े को
नई पीढ़ी का उपहार मिले-
हँसता-गाता परिवार मिले
मिशन आई..........अधिकार मिले.
मिशन आई एक क्रांति है!
बचपन भी ना देखा था कि
लद गए कई बच्चों के भार
पति गया परदेस कमाने
जान सकी ना उसका प्यार
ऐसी अधूरी नारी को, उसका पूरा श्रृंगार मिले
खेती-बाड़ी घर-बार, पति के संग हर त्यौहार मिले.
मिशन आई एक क्रांति है!
बिलखे ममता यहाँ-वहां
भोजन बिन उतरे दूध कहाँ?
आँचल के करे कितने टुकड़े
मासूम ढके या अपना तन?
हां, ऐसी अध्ब्याही मां को
अन्न-जल से भरा भण्डार मिले
उसको उसका संसार मिले
मिशन आई...........अधिकार मिले.
मिशन आई एक क्रांति है!
नौकरी की तलाश में जो
ऑफिस-ऑफिस फिरते हैं
रोज ही जो सौ सीढ़ी चढ़ते
और सौ रोज उतरते हैं
हताश ऐसे लोगों को-
कहीं नहीं दुत्कार मिले
भले नौकरी मिले ना मिले
मगर भला व्यवहार मिले
मिशन आई................अधिकार मिले.
मिशन आई एक क्रांति है!
कुत्ता सोता कार में जिनके
नौकर सोता सीढ़ी पर
हुक्का पीनेवाला माली
अब जीता एक बीड़ी पर
ऐसे घूसखोरों के सर पर
अब जूतों की मार मिले
जिनके पास है काबलियत बस
उन्हें नौकरी और कार मिले.
मिशन आई.............अधिकार मिले.
मिशन आई एक क्रांति है!
आज नहीं तो कल सबको, उसका सपना साकार मिले.
मिशन आई एक क्रांति हैं!
मेहनत की, मजदूरी की
उम्र भी लगभग पूरी की
न पेट भरा जिसका अबतक
सांसों से थके इस बूढ़े को
नई पीढ़ी का उपहार मिले-
हँसता-गाता परिवार मिले
मिशन आई..........अधिकार मिले.
मिशन आई एक क्रांति है!
बचपन भी ना देखा था कि
लद गए कई बच्चों के भार
पति गया परदेस कमाने
जान सकी ना उसका प्यार
ऐसी अधूरी नारी को, उसका पूरा श्रृंगार मिले
खेती-बाड़ी घर-बार, पति के संग हर त्यौहार मिले.
मिशन आई एक क्रांति है!
बिलखे ममता यहाँ-वहां
भोजन बिन उतरे दूध कहाँ?
आँचल के करे कितने टुकड़े
मासूम ढके या अपना तन?
हां, ऐसी अध्ब्याही मां को
अन्न-जल से भरा भण्डार मिले
उसको उसका संसार मिले
मिशन आई...........अधिकार मिले.
मिशन आई एक क्रांति है!
नौकरी की तलाश में जो
ऑफिस-ऑफिस फिरते हैं
रोज ही जो सौ सीढ़ी चढ़ते
और सौ रोज उतरते हैं
हताश ऐसे लोगों को-
कहीं नहीं दुत्कार मिले
भले नौकरी मिले ना मिले
मगर भला व्यवहार मिले
मिशन आई................अधिकार मिले.
मिशन आई एक क्रांति है!
कुत्ता सोता कार में जिनके
नौकर सोता सीढ़ी पर
हुक्का पीनेवाला माली
अब जीता एक बीड़ी पर
ऐसे घूसखोरों के सर पर
अब जूतों की मार मिले
जिनके पास है काबलियत बस
उन्हें नौकरी और कार मिले.
मिशन आई.............अधिकार मिले.
मिशन आई एक क्रांति है!
( गीतकार राकेश निराला ने यह गीत मिशन आई के लिए लिखा है)
Friday, December 10, 2010
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